Dhanurasana (धनुरासन) | Step by Step Guide to do धनुरासन (Bow Pose)

धनुरासन, पद्म साधना की श्रेणी का एक आसन है। धनुरासन दो शब्दो से मिलकर बना है धनुष + आसन = धनुरासन ।धनुष की आकृति के कारण इस आसन का नाम धनुरासन पड़ा ।

धनुष + आसन = धनुरासन

धनुरासन का अभ्यास सामान्य रूप से 2 से 4 बार तक किया जा सकता है और प्रति एक बार में 15 से लेकर 60 सेकंड तक शरीर को स्थिर रखा जा सकता है समय सीमा को धीरे-धीरे बढ़ाते रहेंगे।

इसके अभ्यास मे सारा खिंचाव थुड़ी से लेकर घुटनों तक पूरा गला फेफड़े पेट कमर का हिस्सा और जांघ है। शरीर के अगले हिस्से पर खिचाव उत्पन्न होता है और सारा दबाव पीठ के निचले हिस्से पर और गर्दन के पिछले हिस्से पर।

विशेष रूप से धनुरासन का अभ्यास फेफड़ों और रीड की हड्डी के लिए लाभप्रद अभ्यास है इसके अभ्यास में सारा खिंचा फेफड़ों पर छाती पर वक्त स्थल पर पड़ता है जिससे फेफड़ों और छाती का पूरा विस्तार होता है फेफड़ों के कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होती है और सांस भरने की क्षमता में ज्यादा मात्रा में शरीर के भीतर भरा जाता है फेफड़े सहज स्वाभाविक रूप से अपना कार्य कर पाते हैं।

इसके अभ्यास में पेट के आंतरिक अंग लीवर, किडनी, पैंक्रियास और अन्य आंतरिक अंगों पर खिंचाव उत्पन्न होता है जिससे यह सभी अंग सहज रूप से अपना कार्य कर पाते हैं सक्रिय होकर पैंक्रियास अच्छे प्रकार से अपना कार्य कर पाता है लीवर, किडनी, चटर अग्नि प्रज्वलित भली प्रकार से हो पाती है जिससे कब्ज पेट का ठीक से साफ ना होना, पेट में दर्द रहना, भोजन का पाचन ठीक प्रकार से ना होना, वायु विकार इन समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।

धनुरासन करने का सही तरीका

  1. पेट के बल लेट जाये, पैरो के बीच थोड़ा फासला रखे और दोनों हाथ बिलकुल सीधे रखे जैसे आप खड़े होने पर रखते है।
  2. अब घुटनो को मोड़कर कमर के पास लाये और घुटिका को हाथो से पकड़े।
  3. सांस लेते हुए छाती को जमीन से ऊपर उठाये और पैरो को कमर की तरफ खींचे।
  4. छत की और देखने की कोशिश करें।
  5. श्वास पर ध्यान दे और स्थिर रहे, अब आपका शरीर धनुष की भांति कसा हुआ है।
  6. गहरी सांस लेते हुए धनुरासन में बने रहे।
  7. शरीर को क्षमता अनुसार कसे, ताकत लगाने की कोशिश न करें।
  8. 15-60 seconds बाद , साँस छोड़ते हुए , पैर और छाती को वापस जमीन पर लाये , अंत मे घुटिका को छोड़ते हुए विश्राम करें।

धनुरासन के लाभ

  1. पेट दर्दसे छुटकारा मिल जाता है।
  2. गर्दन दर्द से छुटकारा मिल जाता है।
  3. कमर दर्द से छुटकारा मिल जाता है।
  4. लिवर मजबूत होता है।
  5. पाचन शक्ति मजबूत होती है।
  6. छाती, गर्दन और कंधोँ की जकड़न दूर होती है।
  7. रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है और उसमे लचीला पन आता है।
  8. तनाव और थकान से छुटकारा मिल जाता है।

कौन लोग धनुरासन न करें

  • वह व्यक्ति जिनको उच्च या निम्न रक्तदाब, हर्निया, कमर दर्द, सिर दर्द, माइग्रेन (सिर के अर्ध भाग में दर्द), गर्दन में चोट/क्षति, या हाल ही में पेट का ऑपरेशन हुआ हो, तो आप कृपया धनुरासन ना आजमाएँ ।
  • गर्भवती महिलाएँ धनुरासन का अभ्यास ना करें।

धनुरासन के अभ्यास के तुरंत बाद और तुरंत पहले शशांक आसन या पवनमुक्तासन करें पेट दर्द, गर्दन दर्द, कमर दर्द और सर्वाइकल स्पॉन्डलोसिस के दर्द में या समस्या में आसन का अभ्यास लाभ करता है।

Leave a Comment